भगवान चन्द्रप्रभु(Chandrapabhu)
तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु का जीवन परिचय
श्री चंद्रप्रभु (Chandrapabhu) जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर हैं। इनका जन्म चन्द्रपुर नगर के राजपरिवार में पौष कृष्णा ग्यारस को हुआ था। इनके पिता महाराजा महासेन और माता महारानी लक्ष्मणा थीं। चंद्रप्रभु भगवान का चिन्ह चन्द्रमा है और उनका वर्ण श्वेत था।
केवल ज्ञान की प्राप्ति
तीन माह का छद्मस्थ काल व्यतीत कर दीक्षावन में नागवृक्ष के नीचे फाल्गुन कृष्ण सप्तमी के दिन केवलज्ञान प्राप्त हुआ।
चंद्रप्रभु भगवान का इतिहास
- भगवान का चिन्ह – चन्द्रमा
- जन्म स्थान – चन्द्रपुरी (जिला-बनारस)
- जन्म कल्याणक – पौष कृष्णा ११
- केवल ज्ञान स्थान – फाल्गुन कृष्ण ७
- दीक्षा स्थान – सर्वर्तुकवन
- पिता – महाराजा महासेन
- माता – महारानी लक्ष्मणा
- देहवर्ण – सफेद
- मोक्ष – फाल्गुन शु. ७, सम्मेद शिखर पर्वत
- भगवान का वर्ण – क्षत्रिय (इश्वाकू वंश)
- लंबाई/ऊंचाई – १५० धनुष (४५० मीटर)
- आयु – १०,००,००० पूर्व
- वृक्ष – नागवृक्ष
- यक्ष – विजयदेव
- यक्षिणी – ज्वालामालिनी देवी
- प्रथम गणधर – श्री श्रीदत्त
- गणधरों की संख्या – 93
🙏 चंद्रप्रभु का निर्वाण
चन्द्रप्रभु भगवान समस्त आर्य देशों में विहार कर धर्म की प्रवृत्ति करते हुए सम्मेदशिखर पर पहुँचे। एक माह तक प्रतिमायोग से स्थित होकर फाल्गुन शुक्ला सप्तमी के दिन ज्येष्ठा नक्षत्र में सायंकाल के समय शुक्लध्यान के द्वारा सर्वकर्म को नष्ट कर सिद्धपद को प्राप्त किया।
If you find any factual errors or have suggestions, please leave a comment so the Tapnex Wiki Team can review and update the article.