Suresh Modi

जन्म और मृत्यु का रहस्य: जीवन की फटी हुई पुस्तक के खोए पृष्ठ

मनुष्य का जीवन एक फटी हुई पुस्तक की तरह है। क्या हम उन खोए हुए पन्नों को खोज सकते हैं? लेखक सुरेश मोदी के साथ जानिए जन्म, मृत्यु और आत्मा के उस रहस्य को जो बिजली की तरंगों और जल के भंवर में छिपा है।

भूमिका: एक अनसुलझी पहेली

मनुष्य का जीवन एक ऐसी फटी हुई पुस्तक की तरह है जिसके आदि और अंत के पृष्ठ कहीं खो गए हैं । इसका अर्थ यह है कि इंसान को यह तो पता है कि वह वर्तमान में क्या है, लेकिन उसे इस बात का बोध नहीं कि जन्म के पहले वह क्या था और मरने के बाद उसका क्या होगा । इस ब्रह्मांड में प्राणी मात्र का जीवन आश्चर्य और रहस्यों से भरा है । वैज्ञानिक अब तक पृथ्वी के अलावा कहीं और जीवन नहीं खोज पाए हैं, और जो जीवन यहाँ है, वह भी जन्म और मृत्यु के चक्र में बंधा है ।

एक बुद्धिमान मनुष्य का प्रथम कर्तव्य है कि वह इस पुस्तक के उन 'फटे हुए पन्नों' की तलाश करे और जन्म-मृत्यु की वास्तविकता को गहराई से जानने का प्रयत्न करे ।

जन्म और मृत्यु की परिभाषा

सामान्य अर्थों में, गर्भ से बाहर आने या उत्पत्ति होने को हम 'जन्म' कहते हैं और प्राणों का शरीर से अलग हो जाना 'मृत्यु' कहलाता है । आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो:

  • जन्म: प्राणों का ग्रहण करना ही जन्म है ।

  • मृत्यु: अपनी आयु, इंद्रियों और मन-वचन-काया के बल का किसी विशेष कारण से वियोग हो जाना मरण है ।

प्राणों का शरीर में आना प्रकृति का एक अद्भुत रहस्य है जिसे आज तक कोई पूरी तरह समझ नहीं सका । जिस तरह जन्म का सटीक समय पता नहीं चलता, उसी तरह मृत्यु भी चुपके से आती है ।

मृत्यु से भय क्यों?

विश्व का प्रत्येक प्राणी जन्म लेने के साथ ही मरना प्रारंभ कर देता है । प्रकृति हमें जन्म ही इसलिए देती है ताकि हम मृत्यु की दिशा में रूपांतरित हो सकें । फिर भी, आश्चर्य की बात यह है कि जब मृत्यु इतनी अनिवार्य है, तो हम इसे स्वीकार करने में इतने घबराते क्यों हैं?

इसका कारण लेखक ने अज्ञानता को बताया है । यदि हम मृत्यु को सहज रूप से स्वीकार कर लें, तो इसके प्रति भय का भाव स्वतः ही नष्ट हो जाता है । हम शरीर के बाहरी भाग को देखते हैं, लेकिन जो अदृश्य शक्ति इसे संचालित कर रही है, वह अधिक महत्वपूर्ण है ।

आत्मा और विद्युत (Electricity) का सिद्धांत

लेखक ने आत्मा की अमरता को समझाने के लिए एक बहुत ही आधुनिक और सटीक उदाहरण दिया है—विद्युत तरंग (Electric Wave):

  • हमारे भीतर की चेतना अदृश्य और अरूपी है, बिल्कुल बिजली की तरह ।

  • जैसे यदि कोई बल्ब, फ्रिज या पंखा खराब हो जाए तो इसका मतलब यह नहीं कि बिजली खत्म हो गई है, बल्कि उस वस्तु से उसका संबंध छूट जाता है ।

  • ठीक इसी प्रकार, जब शरीर और चेतना का संबंध टूटता है, तो इंद्रियां काम करना बंद कर देती हैं, लेकिन वह ऊर्जा (आत्मा) विश्व में कहीं न कहीं मौजूद रहती है ।

भंवर का उदाहरण: संघर्ष बनाम समर्पण

जीवन की धारा में मृत्यु एक भंवर (Whirlpool) की तरह है:

  • संघर्ष का परिणाम: जब कोई व्यक्ति भंवर में फंसता है और उससे बाहर निकलने के लिए संघर्ष करता है, तो वह हार जाता है और भंवर उसे मथ देती है ।

  • समर्पण का रहस्य: एक निपुण तैराक उस भंवर में स्वाभाविक रूप से डूब जाता है । वह पाता है कि भंवर का घेरा छोटा होता जा रहा है, और अंत में वह बिना संघर्ष के सुरक्षित बाहर निकल आता है ।

निष्कर्ष: जो मृत्यु को सहज भाव से स्वीकार करता है, वह मृत्यु को जीतकर उससे मुक्त हो जाता है, जबकि डरने वाला व्यक्ति अज्ञानता में डूब जाता है ।

मृत्यु की कला और दर्शन

धर्म का महल मृत्यु की नींव पर खड़ा है; यदि मृत्यु न होती, तो संसार में कोई धर्म ही न होता ।

  • वस्त्र और शरीर: जिस तरह हम फटे हुए वस्त्रों को बदलकर नए वस्त्र धारण करते हैं, आत्मा भी पुराने शरीर को त्यागकर नए शरीर का चुनाव करती है ।

  • जीते-जी मृत्यु का बोध: जो व्यक्ति जीते-जी मृत्यु का बोध कर लेता है, उसके लिए मृत्यु जैसी कोई चीज बचती ही नहीं । उसे अनुभव होता है कि मृत्यु केवल 'परछाई' की तरह है, जो वास्तव में दूसरी तरफ से देखी गई अपनी ही आकृति है ।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का संगम

जहाँ वैज्ञानिक मृत्यु को शारीरिक क्रियाओं का रुकना (हृदय की गति रुकना, रुधिर परिसंचरण बंद होना) मानते हैं, वहीं आध्यात्मिक चिंतन इसे केवल एक 'रूपांतरण' मानता है ।

  • कोयले का उदाहरण: जैसे कोयला जलकर राख बन जाता है, वह नष्ट नहीं होता बल्कि एक रूप से दूसरे रूप में बदल जाता है । पदार्थ का स्वभाव नष्ट होना है ही नहीं ।

  • जीन और क्रोमोसोम: लेखक ने आधुनिक विज्ञान के जीन और क्रोमोसोम के सिद्धांतों का भी उल्लेख किया है, जो गर्भाधान के समय जीवन के वाहक बनते हैं ।

निष्कर्ष: "अप्प दीपो भव"

भगवान बुद्ध का अंतिम वचन था—"अपने दीपक स्वयं बनो" । जीवन और मृत्यु के इस रहस्य को समझने के लिए हमें अपनी प्रज्ञा (बुद्धि) के चक्षु खोलने होंगे । मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक नया द्वार है । यदि हम इसे धैर्य और साहस के साथ स्वीकार करें, तो हम न केवल शांति से मर सकते हैं, बल्कि आनंद के साथ जी भी सकते हैं ।

सम्पादकीय टिप्पणी: यह लेख सुरेश मोदी जी की पुस्तक "जन्म से पहले मृत्यु के बाद" के प्रथम अध्याय पर आधारित है। उनकी लेखनी हमें संसार की नश्वरता के साथ-साथ आत्मा की अनंतता का भी बोध कराती है।

"यह लेख लेखक सुरेश मोदी, द्वारा रचित पुस्तक 'जन्म से पहले मृत्यु के बाद' के विचारों और मूल अंशों से प्रेरित है।"

Suresh Modi Janam Se Pehle Mrityu Ke Baad Spirituality Philosophy Life and Death Hindi Spiritual Articles Atma Sagar MP Author life after death and start what happens after death what heppens before we are born narak swarg